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निर्जला एकादशी 2020: इस दिन भूलकर भी ना करें ये काम

निर्जला एकादशी 2020: इस दिन भूलकर भी

चावल नहीं खाना चाहिए

निर्जला एकादशी  के दिन चावल नहीं खाना चाहिए। ऐसा माना गया है कि  निर्जला एकादशी के दिन चावल खाने से व्यक्ति रेंगने वाले प्राणी की योनि में जन्म लेता है। चावल ना खाने के संबंध में पुराणों में एक कथा  है, जिसके अनुसार एक समय ऋषि मेधा हुए थे।

वे शक्ति के परम भक्त थे, लेकिन किसी एक गलती के कारण देवी उसने भयंकर क्रोधित हो गई। देवी के कोप से बचने के लिए ऋषि मेधा ने योग बल से अपना शरीर छोड़ दिया और उनका अंश धरती में समा गया। उसी अंश से जौ और चावल उत्पन्न् हुए। यह घटना निर्जला एकादशी के दिन हुई थी। इसलिए एकादशी के दिन चावल नहीं खाए जाते हैं।

एकादशी के दिन किसी दूसरे व्यक्ति के घर का अन्न् ग्रहण नहीं करना चाहिए

एकादशी के दिन किसी दूसरे व्यक्ति के घर का अन्न् ग्रहण नहीं करना चाहिए। यदि आप एकादशी का व्रत करते हैं तो दूसरे के घर फलाहार भी नहीं करना चाहिए। आप व्रत नहीं करते हैं तो भी इस दिन अपने ही घर का भोजन ग्रहण करना चाहिए। किसी बाहरी व्यक्ति का दिया हुआ भोजन भूलकर भी ग्रहण ना करें।

एकादशी के दिन किसी भी पेड़ के फूल-पत्ते आदि नहीं तोड़ना चाहिए

एकादशी के दिन किसी भी पेड़ के फूल-पत्ते आदि नहीं तोड़ना चाहिए। इस दिन तुलसी पत्र तो बिलकुल ना तोड़ें, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इस दिन पूजा में उपयोग की जाती है। पूजा के लिए आवश्यक फूल पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

एकादशी के दिन पूर्णत: सात्विक दिनचर्या रखना चाहिए

एकादशी के दिन पूर्णत: सात्विक दिनचर्या रखना चाहिए। एकादशी के दिन बाल, दाढ़ी, नाखून नहीं काटना चाहिए। इस दिन भोग विलास की समस्त चीजों से दूर रहते हुए मानसिक और शारीरिक रूप से सात्विक रहना चाहिए। इस दिन अपनी कामेंद्रियों को वश में रखना चाहिए। इस तरह के विचार मन में लाना भी पाप है।

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