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मोबाइल कंपोनेंट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी: विदेशी कंपनियों की भारत आने की योजनाओं को झटका लगेगा, प्रॉडक्शन बढ़ाने वाली स्कीम का टारगेट पाना हो जाएगा मुश्किल

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  • प्रस्तावित इंपोर्ट ड्यूटी में नुकसान होगा हैंडसम मेकर्स, इंडस्ट्री डिमांड्स रोल बैक

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एक मिनट पहले

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  • मोबाइल फोन के कुछ कंपोनेंट पर बजट में 2.5% का किरा शुल्क लागू करने का प्रस्ताव वापस जाने की मांग कर हैंडसेट कंपनियां बनी रहीं
  • इंपोर्ट ड्यूटी लगने से मोबाइल फोन की बैटरी कवर, एमईआर कवर, सिम सॉकेट और बैक कवर जैसे प्रॉडक्ट बनाने वाली कंपनियों को नुकसान होगा।

सरकार ने मोबाइल फोन के कुछ कंपोनेंट पर बजट में जो 2.5% का किरा शुल्क लागू करने का प्रस्ताव दिया है, उसको हैंडसेट कंपनियों ने वापस जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे हैंडसेट बनाने वाली घरेलू कंपनियों को तो नुकसान होगा ही, ग्लोबल वेल्यू सप्लाई चेन में जुड़ी कंपनियों के भारत आने की योजनाओं को भी झटका लगेगा। उनके अनुसार, इंपोर्ट टैरिफ के कारण प्रॉडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव यानी पीएलआई स्कीम के अंदर तय किए गए इनवेस्टमेंट और प्रॉडक्शन के टारगेट हासिल करने में भी कठिनाई आ गई।

इंपोर्ट ड्यूटी से खत्म हो जाएगा PLI से उद्योग को मिल रहा है

भारत सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है। वहाँ उसने कहा है कि इंपोर्ट ड्यूटी लगाए जाने से पीएलआई के माध्यम से उद्योग को मिल रहे प्रोत्साहन का फायदा खत्म हो जाएगा। एपल, फॉक्सकॉन, विस्ट्रॉन, लावा, सैल्कॉम्प और अन्य जैसी दिग्गज मोबाइल फोन कंपनियां ICEA की एम्बर हैं। ICEA का कहना है कि कुछ मोबाइल कंपोनेंट पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाए जाने से PLI स्कीम के अंदर अगले पांच साल में साढ़े दस लाख करोड़ रुपये के मोबाइल बनाने का टारगेट हासिल करने में भी मुश्किल आ गई है।

बैटरी कवर, एमईएम और बैक कवर, सिम सॉकेट बनाने वाली कंपनियों को नुकसान

ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने अपने पत्र में इंपोर्ट ड्यूटी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उसको तुरंत वापस जाने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी लागू होने से मोबाइल फोन की बैटरी कवर, एमआर कवर, सिम सॉकेट और बैक कवर जैसे मेकेनिकल प्रॉडक्ट बनाने वाली कंपनियों को नुकसान होगा। इन मेके तकनीकी प्रॉडक्ट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट पर कोई इंपोर्ट ड्यूटी नहीं लगती है, बस 18 पर्सेंट जीएसटी लगता है। लेकिन अगले वित्त वर्ष में इन पर 18 पर्सेंट जीएसटी के अलावा 2.5% से 15% तक की इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव आया है।)

ग्लोबल वेल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को ड्यूटी में अक्सर बदलाव करना पसंद नहीं है

एसोसिएशन का कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव अचानक लिया गया है और वह बजट के बाद दिए गए फाइनेंस सेक्रेटरी के बयान के उलट है। ICEA के मुताबिक, फाइनेंस सेक्रेटरी ने कहा था कि सरकारी निवेशकों को टैक्स रेट में स्थिरता वाला माहौल देने के लिए उसके लिए कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही है। मोहिंद्रू ने पत्र में लिखा है, ‘ग्लोबल वेल्यू चेन से जुड़ी कंपनियों को ड्यूटी और टैक्स स्ट्रक्चर में अक्सर बदलाव किया जाना पसंद नहीं है। इसलिए रेवेन्यू सेक्रेटरी के बयान के हिसाब से अक्टूबर 2020 के बाद इसमें रोकव लाना जरूरी था। ‘

घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का जमाना गया

एपल के लिए आईफोन बनाने वाली कंपनियों- विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन के अलावा सैमसंग के कॉन्ट्रैक्ट मेकर्स का स्मार्टफोन सेगमेंट के ग्लोबल वेल्यू सप्लाई चेन में 80 पर्सेंट से ज्यादा हिस्सा है। इन प्रॉडक्शन से जुड़े इनसेंटिव स्कीम के बड़े शिशुओं में भी शामिल हैं। उद्योग का कहना है कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का जमाना गया, अब उसका सबसे अच्छा तरीका पीएलआई स्कीम हो गया है। सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2015-2018 के दौरान फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लान लागू किया था। इसमें कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स प्रॉडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी लगाई गई थी।

‘ड्यूटी बढ़ाकर पैरों पर कुल्हड़ी मारी; कॉस्ट बढ़ेगी, कम्पिटिशन कैपेसिटी घटेगी

मोहिंद्रू ने पत्र में लिखा है, ‘बजट में अचानक इंपोर्ट ड्यूटी लगाने की वजह ग्लोबल वेल्यू चेन के जरिए घरेलू उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने की मंशा बताई गई है, लेकिन उसका यह मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। क्योंकि ये प्रॉडक्ट्स भारतीय कंपनियों न तो अभी बना रहे हैं और न ही अगले 3-5 साल तक बना फाउंडंगी। हमने ड्यूटी बढ़ाकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली क्योंकि इससे हमारी कॉस्ट बढ़ेगी और कंपिटिशन करने की कैपेसिटी घटेगी। ‘

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